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इन्कलाब जिन्दाबाद | भगत सिंह |
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दिल्ली चलो | सुभाष चन्द्र बोस |
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करो या मरो, हे राम , भारत छोडो | महात्मा गांधी |
| जय हिंद | सुभाष चंद्र बोस |
| पूर्ण स्वराज्य, आराम हराम हैं | जवाहर लाल नेहरू |
| वेदों की ओर लौटो | दयानंद सरस्वती |
| जय जवान , जय किसान | लाल बहादुर शास्त्री |
| मारो फ़िरंगी को | मंगल पांडे |
| जय जगत | विनोबा भावे |
| कर मत दो | सरदार बल्लभ भाई पटेल |
| सम्पूर्ण क्रांति | जयप्रकाश नारायण |
| विजयी विश्व तिरंगा प्यारा | श्याम लाल गुप्ता पार्षद |
| वन्दे मातरम | बंकिमचंद्र चटर्जी |
| जन-गण-मन अधिनायक जय है | रविन्द्र नाथ ठाकुर |
| साम्राज्यवाद का नाश हो | भगत सिंह |
| स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है | बाल गंगाधर तिलक |
| सरफ़रोशी की तमन्ना , अब हमारे दिल में है | राम प्रसाद बिस्मिल |
| सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा | इक़बाल |
| तुम मुझे खून दो मै तुम्हें आजादी दूँगा | सुभाषचंद्र बोस |
| साइमन कमीशन वापस जाओ | लाला लाजपत राय |
| हू लिव्स इफ़ इंडिया डाइज | जवाहरलाल नेहरू |
| मेरे सिर पर लाठी का एक एक प्रहार,अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील साबित होगा | लाला लाजपत राय |
| मुसलमान मूर्ख थे , जो उन्होंने सुरक्षा की माँग की और हिंदू उनसे भी मूर्ख थे, जो उन्होंने उस माँग को ठुकरा दिया। | अबुल कलाम आजाद |
| क्रान्ति की तलवार में धार वैचारिक पत्थर पर रगड़ने से ही आती है | भगत सिंह |
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